बोले,युवाओं को इजराइल भेजकर सरकार ने खुद माना कि वो रोजगार देने में असमर्थ
रोहतक- राज्यसभा सांसद दीपेंद्र हुड्डा का कहना है कि रोजगार के हवा-हवाई दावे करके बीजेपी-जेजेपी सरकार लगातार हरियाणा के पढ़े-लिखे बेरोजगार युवाओं के जख्मों पर नमक छिड़क रही है। सांसद दीपेंद्र मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर द्वारा साढ़े 9 साल में 30 लाख रोजगार देने के दावे पर प्रतिक्रिया दे रहे थे। दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि यह सदी का सबसे बड़ा झूठ है। सरकार को बताना चाहिए कि उसने कब 30 लाख पदों के लिए फॉर्म निकले, कब पेपर या इंटरव्यू हुए और कब जॉइनिंग लेटर जारी किए गए? माननीय मुख्यमंत्री को इन 30 लाख लोगों की लिस्ट जारी करनी चाहिए।दीपेंद्र हुड्डा आज खिड़वाली (किलोई) समेत जिले में कई धार्मिक व सामाजिक कार्यक्रमों में शिरकत करने पहुंचे थे। इस मौके पर उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का बयान सच्चाई से कोसों दूर है। सच्चाई यह है कि बीजेपी-जेजेपी ने हरियाणा को देश में सबसे ज्यादा बेरोजगारी वाला राज्य बना दिया है। सीएमआईई के साथ-साथ प्रदेश और केंद्र सरकार की रिपोर्ट भी इसकी तस्दीक कर चुकी है।
मुख्यमंत्री ने खुद माना है कि आज हरियाणा में 8.5 प्रतिशत बेरोजगारी दर है। जबकि भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के दौरान हरियाणा में सिर्फ 2.8 प्रतिशत बेरोजगारी थी। यानी बीजेपी-जेजेपी कार्यकाल के दौरान बेरोजगार में तीन गुना बढ़ोतरी हुई है। क्योंकि ये आज ना युवाओं को सरकारी नौकरियां मिल रही हैं और ना ही निजी क्षेत्र में रोजगार प्राप्त हो रहे हैं। सरकारी नौकरियों की बात की जाए तो ये सरकार साढ़े 9 साल में इतनी नौकरियां भी नहीं दे पाई, जितनी हुड्डा सरकार के दौरान अकेले शिक्षा महकमे में दे दी गई थीं। कांग्रेस कार्यकाल के दौरान अलग-अलग विभागों में 2 लाख से ज्यादा सरकारी नौकरियां दी गईं थीं। जबकि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में 2 लाख से ज्यादा सरकारी पद खाली पड़े हुए हैं। बेरोजगारी का आलम यह है कि चपरासी की कच्ची भर्तियों के लिए भी हरियाणा के एमए, एमफिल, पीएचडी युवा कतार में खड़े मिलते हैं।
बीजेपी-जेजेपी ने निजी क्षेत्र में रोजगार का भी पूरी तरह बंटाधार कर दिया है। कांग्रेस कार्यकाल के दौरान जो हरियाणा प्रति व्यक्ति निवेश में देश का नंबर वन राज्य था, वह आज आरबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक निवेश के मामले में सबसे निचले पायदान पर खड़ा है।
सांसद दीपेंद्र ने कहा कि खुद गठबंधन सरकार मान चुकी है कि वो युवाओं को रोजगार देने में पूरी तरह नाकाम है। इसीलिए वो युवाओं को युद्ध क्षेत्र इजराइल और खाड़ी देशों में मजदूरी करने के लिए भेज रही है। प्रदेश के युवा रोजी-रोटी के लिए अपना घर और जमीन बेचकर दूसरे देशों में पलायन कर रहे हैं। डंकी के रास्ते ही सही किसी ना किसी तरीके से युवा प्रदेश छोड़कर जाने को मजबूर हैं।


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