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| मुख्य आयुक्त के रूप में नियुक्ति |
गौरतलब है कि कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के कार्यकाल में किसानों की जमीनें एक्वायर करने के नाम पर सेक्शन 6 का डर दिखाकर किसानों की जमीनें ओने पौने दामों में तथाकथित बिल्डरों द्वारा खरीदी जाती थी जिसे बाद में रिलीज कर दिया जाता था। उस समय यही आईएएस अधिकारी टीसी गुप्ता थे, जो तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के सबसे खास अधिकारियों में से एक थे। बिल्डरों,राजनेताओं और अधिकारीयों के इस खेल में सबसे बड़े अधिकारी का नाम अगर तत्कालीन आईएएस टीसी गुप्ता का लिया जाता था तो बिल्डरों में डीएलफ और रॉबर्ट वाड्रा का तथा राजनीतिज्ञों में उस समय के मुख्यमंत्री भूपेंदर सिंह हुड्डा का, जिसका राजनीतिक फायदा उस समय भाजपा ने जमकर उठाया था। लेकिन समय का चक्र देखिए कि उसी अधिकारी को आज भाजपा के ईमानदार मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने हरियाणा सेवा का अधिकार आयोग के मुख्य आयुक्त की शपथ दिलाई है।
गौरतलब है कि हरियाणा सरकार ने 30 जनवरी 2019 को, हरियाणा सेवा का अधिकार एक्ट 2014 के तहत आयोग के मुख्य आयुक्त को चुनने के लिए एक कमेटी का गठन किया था। इस आयोग का गठन 2014 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने विभिन्न नागरिक सेवाओं को समयबद्ध सीमा में करने के लिए किया था। मुख्य सचिव कार्यालय से जारी हिदायत सूचना के पैराग्राफ 5 के अनुसार, मुख्य आयुक्त के रूप में नियुक्ति के इच्छुक व्यक्ति को मुख्य रूप से तीन मानदंडों को पूरा करना था- 1. क्या इसके विरुद्ध कोई आपराधिक मामला पंजीकृत है ? यदि हां, तो उसका विवरण। 2. क्या आवेदक किसी अपराधिक अपराध के लिए चार्जशीट किया गया है ? यदि हां, उसका ब्यौरा। 3. आवेदक को किसी अपराधिक अपराध के किसी सक्षम अदालत द्वारा दोषी करार दिया गया है ? यदि हां, उसका विवरण।
उपरोक्त मानदंडों के अनुसार टीसी गुप्ता की हरियाणा सेवा अधिकार आयोग के मुख्य आयुक्त के रूप में नियुक्ति को देखा जाए तो, हरियाणा की भाजपा सरकार और खास तौर पर भाजपा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल सवालों के घेरे में जल्द नजर आने वाले हैं।


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