मेरे लिए, आर्मी के मेजर जनरल डॉक्टर वीके सिन्हा का भारत की प्रमुख स्वास्थ्य संस्था एम्स के प्रमुख डॉक्टर रणदीप गुलेरिया को कोरोना कि बार-बार बदलती गाइडलाइंस पर लिखा पत्र संदेह उत्पन्न करता है, कि कहीं इसके पीछे दवा माफिया तो नहीं ?
आर्मी डॉ वीके सिन्हा ने AIIMS प्रमुख गुलेरिया से पूछा है कि एम्स द्वारा कोरोना के इलाज में बार-बार गाइडलाइन बदलने ने लोगों की जान और माल दोनों का नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने अपने पत्र में कहा है कि, एम्स द्वारा समय-समय पर गाइडलाइन में परिवर्तन किया गया और कहा गया कि पिछला गाइडलाइन अधिक प्रभावी नहीं था।
यदि डॉक्टर सिन्हा के सवाल को आधार बना लिया जाए तो, डॉ. गुलेरिया को देश के सामने यह बताना चाहिए कि उन्होंने किन आधारों को मानक मानकर एम्स की गाइडलाइन्स तैयार की और डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइन को आधार क्यों नहीं बनाया ? जिन दवाओं को डब्ल्यूएचओ पहले ही अप्रभावी बता चुका था, उन्हें इलाज में क्यों शामिल किया गया ? मेजर जनरल डॉ वीके सिन्हा आइवरमेक्टिन इंजेक्शन दिए जाने के निर्देश पर भी सवाल खड़ा करते हुए कहते हैं कि, 7 अप्रैल 2021 को जारी निर्देश में आईवरमैक्टीन देने की बात देश भर के डॉक्टरों ने मानी जबकि डब्ल्यूएचओ इससे पूर्व पिछले साल नवंबर में ही इसे कोरोना में प्रभावी दवाओं की सूची से हटा चुका था।
मेजर जनरल डॉ सिन्हा के अनुसार देश की राजधानी से लेकर गांव तक डॉक्टर स्टेरॉइड लिख रहे हैं, जिसके परिणाम स्वरूप बैक्टीरिया और फंगस संक्रमण के रूप में जानलेवा परिणाम सामने आ रहे हैं।
क्या सेना के चिकित्सक मेजर जनरल डीके सिन्हा की सवालों का जवाब एलोपैथी चिकित्सक देश को देंगे ? या, देश की जनता यह मान ले कि देश में एलोपैथिक चिकित्सा स्टूपिड नहीं, देश के एलोपैथिक चिकित्सक की नजरों में देश की जनता बेवकूफ हैं ?

0 Comments