जनता लॉकडाउन का पालन कर रही है, जिसका सबसे ज्यादा असर मध्य और निम्न मध्य वर्ग के परिवारों पर पड़ा है। अधिकांश या तो प्राइवेट नौकरी पेशा है या छोटे-मोटे काम धंधे कर अपना परिवार पाल रहे हैं, जिन्हें इस समय सबसे अधिक आर्थिक मदद की जरूरत है। यह वह लोग हैं जो अपने बच्चों को खस्ताहाल सरकारी स्कूल में नहीं बल्कि अपना पेट काटकर अच्छी शिक्षा देने के लिए प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाने को मजबूर है।
कोई भी मध्य, निम्न मध्यवर्गीय अभिभावक अपने बच्चों को मुफ्त शिक्षा का हिमायती नहीं। अभिभावक इतना चाहते है की इस लॉकडाउन के कारण जो उसे आर्थिक दिक्क्तें आ रही हैं और आगे आने वाली हैं, उसके कारण उसे सिर्फ इस साल प्राइवेट स्कूलों की सालाना एडमिशन फीस, लॉकडाउन और महामारी के कारण जब तक स्कूल बंद रहेंगे,उस दौरान की पूरी फीस से छूट और प्राइवेट पब्लिशर्स की महंगी किताबों की जगह केवल एनसीआरटी की किताबें लागू करने का स्पष्ट आदेश हरियाणा सरकार प्राइवेट स्कूलों दे ।
महामारी के कारण लॉकडाउन ऊपर से अप्रैल का महीना, इन मध्य और निम्न मध्य वर्ग के अभिभावकों के ऊपर कहर बनकर टूटा है। लॉकडाउन ने इनकी आर्थिक हालत को निम्नतम स्तर पर पहुंचा दिया है। निम्न मध्यवर्गीय अभिभावक साल के इस महीने में बच्चों की सालाना एडमिशन फीस, कई दूसरी चार्ज के साथ ट्यूशन फीस, प्राइवेट स्कूलों द्वारा निर्धारित प्राइवेट पब्लिशर्स की मनमाने रेट की महंगी महंगी किताबें, स्कूल ड्रेस और जूते खरीदने को मजबूर होते हैं। जिसमें एक बच्चे का औसत खर्च 15 से 30 हजार तक चला जाता है, जिस कारण अधिकांश अभिभावक उधार लेने को भी मज़बूर होते हैं,लेकिन बिना किसी को कोसे चुपचाप सब सहते हैं ।
''लॉकडाउन के कारण आर्थिक दिक्क्तें आ रही हैं और आगे आने वाली हैं, उसके कारण सिर्फ इस साल प्राइवेट स्कूलों की सालाना एडमिशन फीस, लॉकडाउन और महामारी के कारण जब तक स्कूल बंद रहेंगे,उस दौरान की पूरी फीस से छूट और प्राइवेट पब्लिशर्स की महंगी किताबों की जगह एनसीआरटी की किताबें लागू करने का स्पष्ट आदेश हरियाणा सरकार प्राइवेट स्कूलों दे''
प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर नकेल कसने में नाकाम
क्योंकि पिछले 6 सालों में हरियाणा कि मनोहर सरकार प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर नकेल कसने में नाकाम रही है। 2017 में वर्तमान मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर बतौर हरियाणा के मुख्यमंत्री रहते हुए, प्राइवेट स्कूलों के ऊपर अपने दिए बयानों से हरियाणा के अभिभावकों खासतौर पर निम्न आय वाले अभिभावकों के आलोचना के शिकार भी हो चुके हैं। उसी प्रकार आज फिर प्राइवेट स्कूलों की फीस को लेकर हरियाणा भाजपा की मनोहर लाल सरकार सवालों के घेरे में है। यह सवाल अप्रैल महीने के शुरुआत से ही उठने शुरू हो गए थे, आज अप्रैल बीतने को है। आज भी हरियाणा का अभिभावक हरियाणा सरकार के प्राइवेट स्कूलों को दिए निर्देशों के करण भ्रम की स्थिति में है। हरियाणा सरकार का निर्देश की जो अभिभावक सक्षम है स्कूल फीस दें, एक तरह से प्राइवेट स्कूलों को मनमानी करने का आदेश है, जिसकी पालना कई प्राइवेट स्कूलों ने मनमानी फीस लेने के रूप में शुरू कर दी है। अभिभावकों को मोबाइल पर सालाना एडमिशन फीस तथा लॉक डाउन के दौरान की फीस जमा करवाने की मांग की जा रही है।
हाई कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद ही 134ए हरियाणा में लागू हो पाया
राइट टू एजुकेशन देने में भी हरियाणा सरकार नाकाम रही थी, हाई कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद ही 134ए हरियाणा में लागू हो पाया था। आज हरियाणावासी अभिभावक मनोहर लाल सरकार की तुलना दिल्ली की केजरीवाल सरकार से करने पर मजबूर है। मनोहर सरकार को यह समझ जाना चाहिए किसी तुलना का क्या अर्थ होता है।
आज हरियाणा का प्रत्येक अभिभावक, मनोहर सरकार की तरफ देख रहा है, की जिस प्रकार एक अभिभावक के रूप के रूप में वह अपने बच्चे को अच्छी से अच्छी शिक्षा देने का दायित्व निभा रहा है, ठीक उसी प्रकार हरियाणा सरकार, हरियाणा वासियों की अभिभावक होने का अपना फर्ज अदा करती है या नहीं ।

