धरती पर अंडमान निकोबार आइलैंड द्वीप समूह सबसे रहस्यमयी द्वीपों में एक माना जाता है। अंग्रेजी राज में काला पानी की सजा सबसे खतरनाक सजाओ में एक मानी जाती थी। भारत के क्रांतिकारियों की दास्तां बयां करती, शहीदों का महातीर्थ सेल्यूलर जेल इसके लिए कुख्यात थी। किसी जमाने में गुलाम भारत के बंदीओं को पोर्ट ब्लेयर के पास वाइपर द्वीप पर उतारा जाता था। जर्जर हो चुके फांसी के फंदे, आज भी भारत वासियों के निर्मम इतिहास के गवाह है। आधा हिंदुस्तान आज भी अंडमान निकोबार आइलैंड को केवल इसी रूप में जानता है। आइए हम आपको बताते हैं, अंडमान के कुछ नए व रोचक तथ्य, जिन्हें जानने महसूस करने हर साल लाखों पर्यटक यहां की सैर करते हैं। अंडमान निकोबार द्वीप समूह 572 द्वीपों से मिलकर बना एक द्वीप समूह है जो लगभग 86 प्रतिशत घने जंगलों से ढका हुआ है। मान्यताओं के अनुसार अंडमान का संबंध हनुमान से माना जाता है, वही निकोबार का मतलब वस्त्र हीन लोगों का द्वीप है। यहां केवल सेल्यूलर जेल ही नहीं कार्विन कोव्स बीच, रोज द्वीप, पीपोघाट फॉर्म, बैरन द्वीप जैसी जगह पर्यटको के लिए आकर्षण का केंद्र है।
55 हजार साल पुरानी सभ्यता
सबसे प्रमुख बात जो इस द्वीपसमूह को रहस्यमयी बनाती है, वह यहां पर रहने वाली आदिवासी जनजातियां हैं। जिनमें आंगे, जारवा, सेम्पियन, सेंटलिस प्रमुख आदिवासी जनजातियां है, जिन्हें अफ्रीकी मूल का माना जाता है।
जारवा जनजाति के बारे में कहा जाता है कि, यह 55000 साल से उसी पाषाण युग में जी रहे हैं, जिसमें इनके पूर्वज रहते आए हैं। आज यह जनजाति विलुप्त होने की कगार पर है। बाहरी लोगों से इनका कोई संबंध नहीं है ना ही बाहरी लोगों को अपने बीच पसंद करते हैं। अनेक ईसाई मिशनरियों ने इनके बीच जाने की कोशिश की, लेकिन इनके आक्रमक स्वभाव के कारण सरकार ने बाद में एक एक्ट पारित कर इस क्षेत्र को ट्राइब रिजर्व एरिया घोषित कर दिया है। हर एक मानवतावादी दृष्टिकोण यह पहल करने की कोशिश करता है कि, इन लोगों को भी मुख्यधारा में लाया जाए और यह लोग भी आधुनिक जीवन का सुख उठा सके। जबकि तथ्य बिल्कुल इसके विपरीत है। प्रकृति में जीते यह आदिवासी कंदमूल और शिकार करने के शौकीन है। जड़ी बूटियों का इनका ज्ञान अद्वितीय है। वैज्ञानिक प्रमाणों से भी यह सिद्ध हो चुका है कि इनका इम्यून सिस्टम हम आधुनिक मानवों से बहुत-बहुत बेहतर है। इस तथ्य को भी उजागर करना चाहिए कि आज का आधुनिक मानव भी आजादी की चाह में इसी प्रकार जीवन प्रकृति की गोद में बिताना चाहता है। इस द्वीप की खूबसूरती के साथ-साथ एक बड़ा आकर्षण यहां का सक्रिय ज्वालामुखी भी है जो 28 मई 2005 में फटा था। तब से अब तक इसमें लावा निकल रहा है। जो एशिया का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी है और अंडमान के बैरन द्वीप पर स्थित है। यहां के द्वीपों पर डॉल्फिन मछलियों के झुंड देखे जा सकते हैं। शीशे की तरह साफ पानी में रंगीन मछलियों को तैरते देखकर लोग अपनी बाहरी दुनिया को अक्सर भूल जाते हैं। कलपोंग अंडमान की एकमात्र नदी है। यह द्वीपसमूह हरे-भरे वृक्षों से घिरे मनोरम समुद्र तटों के लिए प्रसिद्ध है। समुद्र के पानी में डुबकी लगाकर समुद्र का अवलोकन एक अलग ही नजारा पेश करता है। समुद्री किनारों पर सूर्यास्त का नजारा अद्भुत होता है बल्कि अकल्पनीय कहना ज्यादा उचित है।
पोर्ट ब्लेयर अंडमान निकोबार की राजधानी है, जिससे इस सक्रिय ज्वालामुखी की दूरी 135 किलोमीटर है। खास बात यह है की, 572 दीप समूह में केवल 37 ही ऐसे द्वीप हैं जो घूमने और बसने लायक है।
इतिहास से
इस द्वीप समूह पर 18वीं सदी में मराठों द्वारा और उसके बाद अंग्रेजों ने शासन किया। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जापान ने इस पर अधिकार कर लिया तथा कुछ समय के लिए यह नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज के अधीन भी रहा था। देश में पहली बार सुभाष चंद्र बोस ने 30 दिसंबर 1943 को यूनियन जैक उतारकर तिरंगा फहराया था। 30 दिसंबर को हर साल एक भव्य कार्यक्रम भी आयोजित किया जाता है।
कैसे पहुंचे
यहां पहुंचने के लिए वायु मार्ग और जल मार्ग का उपयोग किया जाता है। देश की सभी प्रमुख एयरलाइंस चेन्नई, कोलकाता, दिल्ली, बेंगलुरु, मुंबई और भुवनेश्वर को सीधे पोर्ट ब्लेयर से जोड़ती हैं। कोलकाता चेन्नई और विशाखापट्टनम से समुद्री जहाज पोर्ट ब्लेयर को जाते हैं।

